ऐसे 5 बेहतरीन खिलाड़ी जो गांगुली की कप्तानी में सफल हुए

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ऐसे 5 बेहतरीन खिलाड़ी जो गांगुली की कप्तानी में सफल हुए 5 players got sucess under ganguly

काफी मशक्कत करने के बाद ही किसी भी खिलाड़ी को टीम में जगह मिलती है। सभी के सफलता के पीछे किसी ना किसी के सपोर्ट की जरूरत होती है। जो उन्हें सही रास्ते दिखा सके और उन्हें सभी ऊंचाइयों तक पहुंचा सके। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताएंगे ऐसे पांच भारतीय खिलाड़ी के बारे में जो सौरव गांगुली वजह से इंडियन क्रिकेट मे सफलता हासिल किए।

सौरव गांगुली भारतीय टीम की कप्तानी नहीं बल्कि एक ऐसे रत्न थे जिन्हें टीम कभी उससे अलग नहीं करना चाहती। क्योंकि वह पिंकू लीडर बनाने के साथ ही और मैं जीत और सफलता का जज्बा भी पैदा करते हैं। आप सभी पाठको को हम ऐसे खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं, जो सौरव गांगुली की कप्तानी में अपना सर्वश्रेष्ठ परदर्शन कर काफी सफलता प्राप्त किए।

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महेंद्र सिंह धोनी- महेंद्र सिंह धोनी साल 2004 में भारतीय टीम के लिए डेब्यू किए और 2005 में वे टीम इंडिया में भी अपनी जगह पक्की कर लिए थे। यदि उनके कैरियर का बात किया जाए तो, सौरव गांगुली का प्रयास धोनी को सफल बनाने मे अहम भूमिका निभाए। धोनी विकेटकीपर बल्लेंबाज़ के रूप में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन गांगुली ने उन्हें टॉप ऑर्डर पर बल्लेबाजी करने का मौका दिया। इतना ही नहीं वे अपना बैटिंग ऑर्डर बदलकर धोनी को बल्लेबाजी करने का भी मौका दिये। धोनी भी उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे और खूब रन बनाए। सौरव गांगुली के बाद महेंद्र सिंह धोनी भारतीय टीम के कप्तान बने थे। महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम ने टीम ने तीन आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम किया।

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वीरेंद्र सहवाग- विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हजारों रन बनाए है। वे वनडे क्रिकेट में दोहरा और टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक बनाने का भी कारनामा अपने नाम किए हैं। Virendra Sehwag अपने बल्लेबाजी के दम पर भारतीय टीम को कई मैचों में जीत दिलाए है। सेहवाग बतौर ओपनर डेब्यू नहीं किए थे, वे अजय जडेजा की कप्तानी में अपना डेब्यू किए। उस समय सहवाग छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते थे, लेकिन साल 2002 में सौरव गांगुली की कप्तानी में में इंग्लैंड दौरे पर अपना कमाल दिखाए। सेहवाग धीरे-धीरे एक महान सलामी बल्लेबाज बन गए।

हरभजन सिंह- सबसे सफल भारतीय स्पिनरों में से एक हरभजन सिंह पाजी के नाम से प्रसिद्ध है। वह 100 से भी अधिक टेस्ट मैच खेलते हुए 400 से अधिक विकेट अपने नाम किए हैं। उनके कैरियर का पूरा श्रेय सौरव गांगुली को ही जाता है। क्योंकि गांगुली ने उन्हें 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुए घरेलू श्रृंखला के लिए हरभजन सिंह को चुने थे। साल 2001 की घरेलू श्रृंखला इससे टेस्ट में हैट्रिक लेने के बाद हरभजन सिंह पहले T20 2007 का विश्व कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप जितने में भी भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभाएं थे।

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युवराज सिंह- मात्र 18 वर्ष की उम्र में युवराज सिंह ने 2000 में क्रिकेट में अपना डेब्यू के युवराज सिंह का भी करियर सौरव गांगुली की अगुवाई में ही निखरा। युवराज सिंह भी गांगुली की उम्मीद पर एकदम खरे उतरे और उनके विश्वास को जरा भी ठे’स नहीं पहुंचने दिया। वह T20 विश्व कप और 50 ओवर के विश्व कप में अपना अहम योगदान दिए बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही पारी में अपना शानदार प्रदर्शन के युवराज सिंह को भारत के सबसे महान ऑलराउंडर का नाम मिला है।

अशोक डिंडा- Ashok dinda भारतीय टीम के लिए महान गेंदबाज नहीं बन पाए, क्योंकि वे ज्यादा इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेल पाए। हालांकि डिंडा मैं भी शानदार उछाल और स्विंग पैदा करने की क्षमता थी। उनमें तेज गेंदबाज बनने का भी दमखम भरपूर था। वे अपने अनोखे अंदाज से अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों को भी परेशानी में डाल देते थे। डिंदा कुल मिलाकर 420 प्रथम श्रेणी विकेट अपने नाम किए। डिंडा के क्रिकेट कैरियर में भी निखार सौरव गांगुली के बदौलत ही आया।

इन सभी महान क्रिकेटरों की सफलता की कहानी से यह साफ-साफ कहा जा सकता है, कि सौरव गांगुली एक महान बल्लेबाज ही नहीं बड़े कप्तान और सच्चे खिलाड़ी भी थे जो भारतीय टीम को सभी ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी यहां तक कि वे बीसीसीआई के अध्यक्ष का भी कमाना आज भी संभाल रहे हैं।